देश

भारत में बैन है तो पान मसाला के विज्ञापन कैसे? शाहरुख-अजय-टाइगर को नोटिस के बाद समझिए पूरा खेल

नई दिल्ली

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 'विमल इलायची' के विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है. आरोप है कि 'विमल इलायची' विज्ञापन के जरिए तीनों प्रतिबंधित उत्पादों का 'अप्रत्यक्ष' रूप से प्रचार कर रहे हैं। 

नोटिस में तीनों एक्टर्स को 'ब्रांड एंडोर्सर्स' बताया गया है और उनसे 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. नोटिस को 'फाइनल वॉर्निंग' बताते हुए कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह विज्ञापन भ्रामक विज्ञापन दिखाई पड़ता है और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के विपरित है। 

लगभग 48 हजार करोड़ का है बाजार
शाहरुख, अजय और टाइगर को दी गई चेतावनी में FDA ने कहा कि ये एक्टर 'विमल इलायची' का प्रचार कर रहे हैं लेकिन यह ब्रांड मुख्य रूप से 'पान मसाला' से जुड़ा है। 

यह पान मसाला 3.5 रुपये के छोटे पैकेट में बिकता है. खासकर तब जब इसे तंबाकू के साथ मिलाया जाता है। 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के अनुमानों के हवाले से बताया है कि पिछले साल भारत में पान मसाला मार्केट की वैल्यू लगभग 5 अरब डॉलर थी. भारतीय करंसी में यह रकम लगभग 48 हजार करोड़ रुपये बैठती है।  

फंसते रहे हैं एक्टर्स
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब कथित पान मसाला के विज्ञापन को लेकर सेलिब्रिटी फंसे हों. अक्टूबर 2021 में अमिताभ बच्चन भी एक ऐसी ही विज्ञापन को लेकर फंस गए थे। 

बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि शूटिंग के समय उन्हें यह नहीं पता था कि यह सरोगेट एडवर्टाइजिंग के दायरे में आता है. उन्होंने इस विज्ञापन के लिए मिली फीस भी लौटा दी थी। 

इससे पहले 2016 में जेम्स बॉन्ड फेम एक्टर पियर्स ब्रॉसनन भी एक ऐसे ही एड में दिखाई दिए थे. इस पर काफी बवाल हुआ था. इसके बाद पियर्स ब्रॉसनन ने दावा किया था कि उन्हें नहीं पता था कि यह पान मसाला था। 

उन्होंने दावा किया था कि उनके कॉन्ट्रैक्ट में तय हुआ था कि उन्हें एक ब्रेथ फ्रेशनर या टूथ व्हाइटनर का एड करना है. उन्होंने यह भी कहा था कि पान मसाला कंपनी ने अपने विज्ञापन के लिए उनकी तस्वीर का बिना इजाजत और धोखे से इस्तेमाल किया है। 

बैन है तो विज्ञापन कैसे कर लेते हैं?
लेकिन सवाल उठता है कि जब भारत में पान मसाला, तंबाकू, सिगरेट और शराब के विज्ञापन पर बैन है तो सेलेब्रिटी इनके विज्ञापन कैसे कर लेते हैं? 

इस सारे खेल को 'सरोगेट एडवर्टाइजिंग' यानी छद्म विज्ञापन कहा जाता है. ऐसे में कंपनियां अक्सर तंबाकू वाले ब्रांड से मिलता-जुलता 'इलायची', 'माउथ फ्रेशनर' या दूसरे 'सरोगेट प्रोडक्ट' का इस्तेमाल करती हैं. मतलब टीवी या अखबार में सीधे 'तंबाकू' तो नहीं कहा जा सकता, इसलिए कंपनियां अक्सर इलायची या माउथ फ्रेशनर के नाम पर अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करती हैं। 

भारत में सरोगेट एडवर्टाइजिंग का चलन तब बढ़ा, जब 'केबल टीवी नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट 1995' के तहत शराब, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के सीधे विज्ञापन पर रोक लगा दी घई। 

सरोगेट एडवर्टाइजिंग का मकसद ग्राहकों के मन में ब्रांड की पहचान बनाना होता है. एक ही ब्रांड वाले नए उत्पादों को 'ब्रांड एक्सटेंशन' कहा जाता है, जो इस कानून के तहत गैर-कानूनी नहीं है. कानून 'ब्रांड एक्सटेंशन' के नाम पर ऐसे सरोगेट विज्ञापनों के लिए कुछ छूट देते हैं. जैसे- कुछ शराब कंपनियां म्यूजिक सीडी या सोडा के नाम पर अपना विज्ञापन करती हैं। 

'सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट (COTPA) 2003' तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर रोक लगाता है. यह कानून तंबाकू उत्पादों के ब्रांड नाम का इस्तेमाल करके दूसरे सामानों के विज्ञापन की भी इजाजत नहीं देता है. लेकिन बिना तंबाकू वाले पान मसाले का विज्ञापन किया जा सकता है। 

हालांकि, सेलेब्रिटीज के सादे पान मसाले के विज्ञापन करने पर भी रोक है. एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) की साफ गाइडलाइंस हैं कि सेलेब्रिटीज ऐसे उत्पादों का प्रचार नहीं कर सकते जिन पर कानूनन स्वास्थ्य चेतावनी छपी हो। 

सरकार क्या कर रही है?
सरोगेट विज्ञापनों को लेकर सरकार पहले भी चिंता जता चुकी है और मौजूदा नियमों को लेकर अक्सर अदालतों में विवाद होता रहा है। 

रायटर्स ने 2024 में रिपोर्ट किया था कि शराब कंपनियों के सरोगेट एडवर्टाइजिंग करने की शिकायतों के बाद भारत सरोगेट विज्ञापनों को लेकर सख्त नियम बना रहा था. हालांकि, अब तक ये नियम बने नहीं हैं। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button