
चंडीगढ़
हरियाणा के उन शहरी इलाकों में नई आवासीय प्लॉटेड कॉलोनियों विकसित की जाएंगी, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रविधान लागू नहीं होते। शहरों में तेजी से पनप रही अनियमित कॉलोनियों की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने नई आवासीय प्लॉटेड कॉलोनियों के लिए लाइसेंस देने का निर्णय लिया है, जिनमें 50 वर्ग मीटर से लेकर 250 वर्ग मीटर के प्लॉट काटे जा सकेंगे।
पालिका क्षेत्रों में नियंत्रित क्षेत्र से बाहर न्यूनतम पांच एकड़ क्षेत्र में यह प्लॉटेड कॉलोनियों विकसित की जा सकेंगी। इनमें न्यूनतम 65 प्रतिशत प्लॉट आवासीय होंगे, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए अधिकतम पांच प्रतिशत हिस्सा निर्धारित रहेगा।
मंत्रिमंडल के फैसले को लागू करते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने अधिसूचना जारी कर दी है। नगर निकाय क्षेत्रों में, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रविधान लागू नहीं हैं, आवासीय प्लॉटेड आवास हेतु नई टाउन प्लानिंग योजना को लागू किया गया है। नए नियमों का उद्देश्य ऐसे नगर निकाय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं विनियमित आवासीय विकास सुनिश्चित करना है।
स्वीकृत योजना के अनुसार आवासीय प्लॉटेड आवास परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पांच एकड़ भूमि आवश्यक होगी, जबकि अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परियोजना स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क होनी चाहिए, जिसकी चौड़ाई कम से कम 33 फीट हो। आवासीय प्लॉटों का आकार 50 वर्गमीटर से 250 वर्गमीटर के बीच होगा। साथ ही प्रत्येक परियोजना में कम से कम 50 प्रतिशत आवासीय प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि किफायती आवास को बढ़ावा मिल सके।
परियोजना क्षेत्र के अधिकतम 65 प्रतिशत हिस्से का उपयोग आवासीय प्लॉटों के लिए किया जा सकेगा, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र का हिस्सा अधिकतम पांच प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अतिरिक्त परियोजना के भीतर सभी आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई 10 मीटर निर्धारित की गई है।
नई योजना का उद्देश्य राज्य में आवासीय विकास के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना और अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करना है। इससे आवास क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा नई अनधिकृत कॉलोनियों को पनपने से रोकने में मदद मिलेगी।
डेवलपर्स को देना होगा 10 रुपये प्रति वर्गमीटर स्क्रूटनी शुल्क
डेवलपर्स को हरियाणा शहरी अवसंरचना विकास बोर्ड (एचयूआइडीबी) के मुख्य प्रशासक को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्क्रूटनी शुल्क जमा कराना होगा। इसके अलावा उन्हें लो-पोटेंशियल जोन में आवासीय उपयोग के लिए लागू परिवर्तन शुल्क का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके साथ ही डेवलपर्स को प्रचलित बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) का 25 प्रतिशत विकास शुल्क के रूप में एचयूआइडीबी को देना होगा। यह दर नगर समितियों और नगर परिषदों दोनों में समान रूप से लागू होगी।


