
अमृतसर.
असम की डिब्रूगढ जेल में बंद पंजाब की खडूर साहिब सीट से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने सतवंत सिंह को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पहला उम्मीदवार घोषित किया है। सतवंत सिंह केहर सिंह के बेटे हैं।
केहर सिंह ने साल 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश रची थी। अदालत ने केहर सिंह को दोषी ठहराते हुए 1989 में फांसी की सजा दी गई थी।
कौन हैं सतवंत सिंह?
61 साल के सतवंत सिंह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के मुस्तफाबाद गांव के निवासी हैं। वह बैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। साल 2027 में उनका यह पहला चुनाव होगा। इससे पहले साल 2024 के लोकसभा चुनाव में फरीदकोट सीट से चुनाव जीतने वाले सरबजीत सिंह खालसा के लिए सतवंत ने प्रचार किया था।
अगले साल है विधानसभा चुनाव
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) भी चुनाव में भाग लेगी। इस तरह सतवंत सिंह को पार्टी ने फतेहगढ़ साहिब की सीट बस्सी पठाना से अपना पहला उम्मीदवार बनाया है। पिछले साल लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा था और इस चुनाव में उसने बंपर जीत हासिल की थी। जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी 'अकाली दल (वारिस पंजाब दे)' ने सोमवार को सतवंत सिंह को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपना पहला उम्मीदवार घोषित किया।
गोलियां मारकर की थी इंदिरा गांधी की हत्या
ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए साल 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो अंगरक्षकों, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने कर दी थी। केहर सिंह को इस हत्या की साजिश का मास्टर माइंड माना गया और 6 जनवरी, 1989 को तिहाड़ जेल में सतवंत सिंह के साथ उसे भी फांसी दे दी गई। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बेअंत के बेटे खालसा ने फरीदकोट सीट निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीती थी, जबकि अकाली दल (WPD) के संस्थापक अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। इससे पंजाब की राजनीति में कट्टरपंथी पंथिक सोच के फिर से उभरने का संकेत मिलता है। साल 2024 के चुनावों में सतवंत ने खालसा के लिए प्रचार किया था।



