पंजाबराज्य

पंजाब में खराब परीक्षा परिणाम पर सख्ती, 68 स्कूलों के प्रिंसिपलों पर कार्रवाई की तैयारी

चंडीगढ़.

पंजाब के सरकारी स्कूलों में लगातार कमजोर परीक्षा परिणाम देने वाले प्रिंसिपलों पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने राज्य के 68 स्कूलों के प्रिंसिपलों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन स्कूलों का दसवीं और बारहवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम लगातार खराब रहा है, जिसके चलते विभाग ने जवाबदेही तय करने का फैसला लिया है।

जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों का प्रदर्शन लगातार अपेक्षा से कम रहा, उनके प्रिंसिपलों से पहले स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब प्राप्त जवाबों की समीक्षा के बाद विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना स्कूल प्रमुखों की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शिक्षा गुणवत्ता सुधारने पर विभाग का फोकस
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नियमित समीक्षा, निरीक्षण और प्रदर्शन के आधार पर जवाबदेही तय की जा रही है। जिन स्कूलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लगातार कमजोर नतीजे देने वाले स्कूलों के लिए विशेष सुधार योजना लागू की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ाई का स्तर, शिक्षण व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की भी निगरानी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित स्कूलों को शैक्षणिक सहायता और अतिरिक्त मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि भविष्य में परिणामों में सुधार हो सके।

जवाबदेही से सुधरेगा शिक्षा का स्तर
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे स्कूलों की नियमित निगरानी करें और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। यदि आगामी सत्र में भी अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि जवाबदेही तय होने से सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। विभाग ने सभी स्कूल प्रमुखों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित शैक्षणिक मूल्यांकन और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

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