बिहारराज्य

मुंगेर नगर निगम का सख्त आदेश, 72 घंटे में बकाया जमा करें वरना संपत्ति होगी सील

मुंगेर.

वर्षों से होल्डिंग टैक्स और यूजर चार्ज बकाया रखने वाले बड़े बकायेदारों पर अब नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर बकाया राशि जमा करने का अल्टीमेटम दिया है।

चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर संपत्ति सील करने से लेकर कुर्की-जब्ती, चल-अचल संपत्ति की बिक्री और बैंक खाते फ्रीज करने तक की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के अनुसार तोपखाना बाजार स्थित नेशनल अस्पताल व मु. गुलाम मोईन उद्दीन सहित संबंधित पक्षों पर वर्ष 2011-12 से 2026-27 तक का 20.76 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स बकाया है।

इसके अलावा 36 हजार रुपये यूजर चार्ज भी पेंडिंग है। इस प्रकार कुल बकाया राशि 21.12 लाख रुपये पहुंच गई है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तीन दिनों के भीतर राशि जमा नहीं होने पर 12 जून से बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 158 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। साथ ही जिन्होंने नोटिस नहीं लिया है उन्हें डाक से भी भेजा गया है। चस्पा भी कर दिया गया है।

होटल संचालकों को भी चेतावनी
वार्ड संख्या-26 स्थित होटल मुरारी पैलेस के स्वामी रामेश्वर बजाज एवं ज्वाला बजाज को भी अंतिम नोटिस भेजा गया है। होटल पर वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक 5.18 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स तथा 12 हजार रुपये यूजर चार्ज बकाया है। कुल मिलाकर 5.30 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है।
निगम ने होटल प्रबंधन को भी जल्द से जल्द बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है। अन्यथा उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, दो अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी बकाया कर भुगतान के लिए नोटिस जारी किया गया है। निगम प्रशासन अब बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।

राजस्व बढ़ाने के लिए तेज हुआ अभियान
नगर निगम का कहना है कि शहर के विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के संचालन के लिए कर संग्रह बेहद जरूरी है। ऐसे में लंबे समय से बकाया रखने वालों के खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। निगम की इस कार्रवाई से बड़े बकायेदारों में हड़कंप मच गया है।
वहीं, प्रशासन का दावा है कि अभियान से राजस्व वसूली में तेजी आएगी और वर्षों से पेंडिंग करोड़ों रुपये की राशि वसूलने का रास्ता साफ होगा।

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