पंजाबराज्य

अमृतसर में अकाल तख्त साहिब पहुंचा SGPC प्रतिनिधिमंडल, सुखबीर बादल पर कार्रवाई की मांग

अमृतसर में सोमवार को सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर उस समय गंभीर और संवेदनशील माहौल देखने को मिला जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मास्टर मिठू सिंह काहनेके के नेतृत्व में वहां पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने जत्थेदार साहिब को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और उनके खिलाफ सख्त धार्मिक कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि सुखबीर सिंह बादल द्वारा दिए गए बयान सिख मर्यादा, परंपराओं और धार्मिक अनुशासन के खिलाफ हैं, जिससे पूरे पंथ की गरिमा को ठेस पहुंची है। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अकाल तख्त साहिब के आदेशों को साजिश बताना बेहद गंभीर और अस्वीकार्य कदम है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सिख पंथ की सर्वोच्च मर्यादा का हवाला
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सिख इतिहास के कई उदाहरणों का उल्लेख किया, जिसमें बताया गया कि जब भी किसी ने पंथिक नियमों का उल्लंघन किया, तो उसने अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर अपनी गलती स्वीकार की और सजा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल अनुशासन नहीं बल्कि सिख पंथ की आस्था और सम्मान का मूल आधार है।

प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गलत संदेश देगा और भविष्य में अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अनदेखी करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।

‘तनखैया’ घोषित करने की जोरदार मांग
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर मांगपत्र यह रहा कि सुखबीर सिंह बादल को “तनखैया” घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केवल ऐसी सख्त धार्मिक कार्रवाई ही पंथ की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रख सकती है। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरी सिख परंपरा की गरिमा से जुड़ा हुआ है।

SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल
इस विवाद के बीच SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना SGPC नेतृत्व की जिम्मेदारी थी, लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर मांग की गई कि SGPC अध्यक्ष को भी अकाल तख्त साहिब में तलब किया जाए और उनसे पूरी जवाबदेही तय की जाए।

पंथिक एकता बनाम राजनीतिक टकराव
इस पूरे घटनाक्रम ने सिख पंथ के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक तरफ पंथिक मर्यादा और अनुशासन की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी इस विवाद को और जटिल बना रही है।

सख्त चेतावनी और भविष्य की चिंता
प्रतिनिधिमंडल ने अंत में चेतावनी दी कि यदि अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह एक खतरनाक परंपरा स्थापित कर सकता है, जिससे भविष्य में धार्मिक संस्थाओं की शक्ति और सम्मान दोनों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंथ की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए कठोर निर्णय लेना अब अनिवार्य हो गया है।

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